Learn Indian Classical Vocals

Indian vocals

Our Vocal training courses specialise in creating a sound foundation in ear-training, basics of music and its practical application. We have a variety of vocal programs to choose from and groom them in various styles according to their preferences and skills.

Hindustani Vocals / North Indian Classical: Hindustani Music or “Shashtriya Sangeet” is intrinsic to India and dates back to the 12th century! Learn about the detailing which go into music ragas (modes) and taal (rhythm) which form the base of music in India. This streamlines the individual need of the student to the teaching modules at the club.


भारतीय शास्त्रीय संगीत / Indian classical music


Level 1

१) सीधे ढंग से , धीरे धीरे शुद्ध स्वर लगाना। ( ओमकार का अभ्यास और श्वास सहजता से पेट से लेने का प्रयास सीखना)

२)बाद में वाही स्वर ले के अनुसार हाथ से आघात करके गाना।

३) कुछ गीत और राग पर आधारित गाने सुनाना।

४)वाद्यों की जानकारी ( तबला , तानपुरा , हार्मोनियम , सितार , संतूर, बांसुरी इत्यादि। )

जन गण मन अधिनायक जय हे शुद्ध उच्चारण , स्वरताल बद्ध गाना।

५)सा रे ग म प ध नी सां। ..

सां नी ध प म ग रे सा

६)सासा , रेरे, गग , मम ,पप..

सांसां , नीनी , धध

७)सासासा , रेरेरे , गगग, …..

सांसांसां , नीनीनी , धधध

८)सासासासा  , रेरेरेरे  , गगगग , …..

सांसांसांसां  , नीनीनीनी  , धधधध

९)सासासासासा   , रेरेरेरेरे   , गगगगग, …..

सांसांसांसांसां  , नीनीनीनीनी   , धधधधध

१०)सासासासासासा    , रेरेरेरेरेरे   , गगगगगग , …..

सांसांसांसांसांसां   , नीनीनीनीनीनी    , धधधधधध

११)सासासासासासासा     , रेरेरेरेरेरेरे    , गगगगगगग , …..

सांसांसांसांसांसांसां , नीनीनीनीनीनीनी , धधधधधधध

१२)सारे , रेग , गम, मप …

सांनी , नीध , ध प , पं

१३)सा , सारेसा , सारेगरेसा, सारेगमगरेसा

सां , सांनीसां ,सांनीधनीसां , सांनीधपधनीसां

१४)सारेग , रेगम, गमप …

सांनीध , नीधप, धपम …

 

नीचे दिए गए रागोंमे एक सरगम गीत और एक बंदिश ताल में गाना।

निचे दिए गए रागों में अलंकार बाँधना।

रागों के आरोह अवरोह गाना और पहचानना।

रागों के वादी संवादी , समय और आरोह अवरोह लिखना और जानना।

ताल – तीनताल , दादरा , कहरवा।

अलंकारोका वजन बदल बदल के उन्हे दादरा और केरवा मी गाना।

 

राग यमन –

राग बिलावल –

राग भूप –

 

Level 2

शुद्ध स्वरों को अकार , उकार , इकार , ओकार , मकार में गाना।

कोमल स्वर गाना और पहचानना।

शुद्ध स्वरों के एक स्वर छोड़ के अलंकार बनाना।

वन्दे मातरमशुद्ध उच्चारण के साथ और स्वर ताल में गाना।

ताल तीनताल , कहरवा और दादरा , एकताल की शुरुवात , सरे ताल मध्य ले में हाट से ताली और खाली देके सीखना।

ताल –  खंड , ताली ,खाली और मात्र के साथ लिखना।

 

अलंकार

१)साग , रेम, गप ..

सांध , नीप , धम …

२)सागरे , रेमग , गपम ..

सांधनी , नीपध , धमप

३)सारेगम , रेगमप ..

सांनीधप , नीधपम

४)साम , रेप , गध। ..

सांप , नीम , धग

५)साप , रेध  ….

सांम , नीग

६)सा रे , सा ग , सा म , सा प , सा ध , सा नी  सा सां। … सां नी , सां ध , सां प , सां म , सां ग ,सां रे , सां सा

७)सा ग रे सा , रे म ग रे , ग प म ग। ….. सां ध नी सां , नी प ध नी। ….

 

सारे अलंकार ताल में गाना।

 

नीचे दिए रागों की जानकारी , वादी संवादी , आरोह अवरोह, पकड़ चलन , इन रागों के सरगम गीत ताल में गाना।

 

इन रागों में से किसी भी दो रागों के लक्षणगीत गाना।

कहरवा या दादरा में कोई भी गीत और एक भजन।

संगीत के शब्दों से परिचय – स्वर, वर्जित स्वर, तीव्र व कोमल स्वर , सप्तक , अलंकार , वादी संवादी , सरगमगीत , लक्षणगीत,स्थायी , अन्तरा , आलाप , तान , लय (विलम्बित , मध्य , द्रुत ) मात्र , ताल , आवर्तन, ठेका , खंड, ताली ,खाली।

 

 

राग दुर्गा

राग सारंग

राग काफी

राग खमाज

राग भीमपलास

 

 

Level 3

सिखे हुये सारे अलंकारोका द्रुत लय मे अभ्यास।

अलंकारो कि लयकारी का अभ्यास ( एक मात्र मे  एक / दो/ तीन/चार स्वर हाथ से लय देकार प्रयोग करने का अभ्यास।

 

ताल रूपक, धमार  और झपताल

 

१. सागरेसा , रेमगरे …. सांधनीसां , नीपधनी

२. सारेसाग , रेगरेम …. सांनीसांध , नीधनीप

३. सारेगरेगसारे , रेगमरेगरेम …. सांनीधनीधसांनी  (रूपक )

४. सामगरे , रेपमग … सांपधनी , नीमपध (एकताल )

५. सारेगरेसा …. सांनीधनीसां (झपताल)

६. सारेगरेग s …. सांनीधनीध s (एकताल)

 

राग भैरव

राग बागेश्री

राग अलहैया बिलावल (बडा खयाल )

राग देस

राग बिहाग

 

इन रागो में  आरोह अवरोह , प्रारंभिक आलाप और एक मध्यलय का ख्याल पंच आलाप तथा पांच तानो सहित गाना।

तराना , लक्षण गीत , भजन , लोकगीत।

तबले पर तालों  के बोलों  को पहचानना।

सारे ताल हात से ताली देकार और खाली दिखाकार दुगून मे बोलना।

 

Level 4

स्वर ज्ञान में आलाप में मींड़ , गमक , कण , स्पर्शस्वर , खटका और मुरकी का प्राथमिक अभ्यास और उसका राग विस्तार में उचित प्रयोग करना।

 

राग तिलककामोद

राग भैरवी

राग पुरिया धनश्री

राग केदार

राग जौनपुरी

राग शिवरंजनी

राग श्री

 

इन सारे रागों में विलम्बित तथा एक द्रुत बंदिश – स्थायी अन्तर और अंत में पांच आलाप तानों सहित गायन

ताल तिलवाड़ा और पहले सीखे सरे तालों को चौगुन में हाथ से बजाना

 

Level 5

राग मारुबिहाग

राग मारवा

राग मधुवंती

राग छायानट

राग जोग – तिलंग

राग हंसध्वनी

 

आलाप , बोल आलाप तथा तानो में सुरीलापन

बढ़त करने का अभ्यास

दीपचंदी , आडा चौताल

 

 

Level 6

राग आसावरी

राग बसंत

राग मल्हार

राग मालकंस

राग दरबारी

राग तोडी – मुलतानी

 

Level 7

राग बिलासखानी तोडी – भैरवी

राग भटियार

राग ललत

राग गौडसारंग

राग नंद

राग पुरिया

राग रागेश्री

 

Level 8

राग श्री

राग गोरखकल्याण

राग कलावती

राग नट भैरव

राग चारुकेशी

राग श्याम कल्याण

 

Online Classes Enquiry Academy Classes Enquiry